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भारत के उच्च मानक हैं, भारत भले नरमी से बात करे लेकिन उसकी ताकत में कम नहीं: अमरीकी विशेषज्ञ 

वाशिंगटन। भारत भले नरमी से बात करे लेकिन ताकत कम नहीं – अमेरिकी विशेषज्ञ का मानना है कि भारत और चीन के बीच डोकलाम तनातनी पर ट्रम्प प्रशासन की स्थिति असहज हो गई थी। वह भारत और चीन के विवाद में पड़ना नहीं चाहता था। खासकर ऐसे समय में जब उसे उत्तर कोरिया से निपटने के लिये चीन की मदद की आवश्यकता है।

भारत भले नरमी से बात करे लेकिन ताकत कम नहीं

द हेरिटेज फाउंडेशन में दक्षिण एशिया पर रीसर्च फेलो और साउथ एशिया नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (व्हाइट हाउस) के नवनियुक्त निदेशक जेफ स्मिथ ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि डोकलाम संकट की वजह से ट्रम्प प्रशासन की स्थिति बेहद असहज हो गई थी। यह वो विवाद था जिसमें वह बिलकुल नहीं पड़ना चाहते थे। हालांकि स्मिथ ने यह स्वीकार किया कि उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं है कि वास्तव में ट्रम्प प्रशासन ने इस मामले पर आपस में आतंरिक स्तर पर क्या चर्चा की।

भारत का पक्षधर है

स्मिथ ने कहा कि इस विवाद के दौरान अगर आप अमेरिकी प्रशासन के बयानों की पीछे के अर्थ को समझें, आपको लगेगा कि वास्तव में जापान भारत की इस स्थिति का ज्यादा समर्थन करता है। अगर चीन भारत से बातचीत के लिये डोकलाम से हटने की पूर्व शर्त लगा रहा था तो ट्रम्प प्रशासन दोनों पक्षों को संकेत दे रहा था कि वह भारत का पक्षधर है। लेकिन आखिर में हुआ क्या। चीन का रुख लचीला था कि वह किसी समझौते तक पहुंच सके। आखिर में आपसी सहमति से दोतरफा समझौता करते हुए दोनों देशों ने न्यूनतम जरूरतों को पूरा किया।

भारत ने दिखा दिया

उन्होंने कहा हालांकि भारत ने कई मायनों में चीन और समूचे विश्व को यह दिखा दिया कि उसके उच्च मानक हैं। वह भले ही नरमी से बात करे लेकिन उसकी ताकत में कहीं कोई कमी नहीं है। भारत ने अपना लक्ष्य स्पष्ट कर दिया और उसे हासिल भी कर लिया।
उल्लेखनीय है कि विगत सोमवार को भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर 75 दिन चला विवाद खत्म हुआ। लिहाजा दोनों देशों ने अपनी सेनाएं डोकलाम से हटा लीं। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) सम्मेलन में शामिल होने के लिये चीन जाने पर हामी भरने से सिर्फ एक दिन पहले हुआ।

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